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 About Jiwaji Observatory


इस वेधशाला का निर्माण जयपुर के महाराज सवाई राजा जयसिंह (द्रितीय )ने सन् 1719 में (दिल्ली के सम्राट मुहम्मद शाह के शासनकाल में मालवा के गवर्नर होकर उज्जैन में रहे थे) किया था, राजा जयसिंह शूर सेनानी, राजनीतिज्ञ व्यवस्थापक तो थे ही, विशेष रूप से विद्वान भी थे। आपने तत्कालीन उपलब्ध पार्षियन और अरबी भाषा में लिखित ज्योतिष गणित ग्रन्थों का भी अनुशीलन किया था। स्वयं ने भी ज्योतिषग्रन्थों की रचना की।

समरकन्द में तैमूरलंग के नाती मिर्जा उलूक बेग ने जो ज्योतिषशास्त्र के मर्मज्ञ थे, वेधशाला बनवाई थी। सम्राट मुहम्मद शाह की आज्ञा से भारत में राजा जयसिंह ने उज्जैन, जयपुर, दिल्ली, मथुरा तथा वाराणसी में वेधशालाएॅं बनवाई। इन वेधशालाओं में राजा जयसिंह ने अपनी योग्यता से नये यंत्रों का निर्माण करवा कर स्थानीय वेधशाला पर उन्होंने करीब 8 वर्ष तक स्वयं ग्रह-नक्षत्रों के वेध लेकर ज्योतिर्गणित के अनेकों प्रमुख उपकरणों में संशोधन किया।

तत्पश्चात् दो शताब्दी तक यह वेधशाला उपेक्षित रही। सिद्वांन्दवार्गीष स्व.श्री नारायण जी व्यास गणक चूड़ामणि, स्व.श्री गो.सा. आपटे वेधशाला के प्रथम अधीक्षक थे, के प्रस्तावानुसार स्व.महाराजा माधवराव सिंधिया ने सन् 1923 में इसका पुनरुध्दार करवाकर वेधाशाला का उपयोग करने के लिये आर्थिक व्यवस्था की। तभी से यह वेधशाला निरंतर कार्य कर रही है।

सन् 2003 में इस वेधशाला का सौन्दर्यीकरण किया गया साथ ही ऊर्जा विकास निगम के सौजन्य से यहाॅं 10 सूर्य ऊर्जा संचालित सोलर ट्यूबलाईट लगायी गयी व म. प्र. लघु उद्योग निगम के सौजन्य से वेधशाला के शिप्रा तट पर सुन्दर घाट का निर्माण करवाया गया। इसी वर्ष शिक्षा विभाग द्वारा नवीन 8 इंच व्यास का स्वचलित टेलीस्कोप भी क्रय किया गया है।

वर्ष 2009 में मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा वेधशाला में तारा मण्डल एवं इन्टर प्रिंटेशन केन्द्र के अंतर्गत कार्यालय भवन, पुस्तकालय भवन एवं सभाकक्ष का निर्माण किया गया।

सन् 2014 में म. प्र. शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वेधशाला उन्नयन प्रस्ताव स्वीकृत किये गये । जिसके अन्तर्गत रिटेनिंगवाॅल, बाउण्ड्रीवाॅल, भव्य प्रवेशद्वार, टिकटघर, आर्किटेक्ट की डिजाइन अनुसार नवीन वृताकार पथ एवं बगीचे का निर्माण , प्राचीन यन्त्रों का सोन्दर्यीकरण, सवाई राजा जयसिंह (द्वितीय) की मूर्ति की स्थापना, परिसर एवं यन्त्रों का विघुत व सोलर लाइट से सोन्दर्यीकरण, घाट का पुनर्निमाण, तारामण्डल में डिजिटल प्रोजेक्टर, पुशबैक कुर्सी व वातानुकूलन की व्यवस्था, सभा कक्ष का सोन्दर्यीकरण कर उसमें 3डी प्रोजेक्टर की स्थापना, नवीन बैठक व्यवस्था व वातानुकूलन की व्यवस्था, पूर्ण कम्प्यूटरीकरण व वाई-फाई सुविधा युक्त परिसर, कम्प्यूटरीकृत टिकट व्यवस्था, परिसर की निगरानी हेतु सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, प्राचीन ग्रन्थों का डिजिटलाइजेशन, जनसेट की व्यवस्था, शुद्ध शीतल पेयजल की व्यवस्था, आधुनिक प्रसाधन व्यवस्था के कार्य सिंहस्थ-2016 के पूर्व पूर्ण किये गये ।

 
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